हार गई दंगल गर्ल ज़ायरा वसीम

zaira wasim

दंगल गर्ल यानि ज़ायरा वसीम ने बॉलीवुड को बॉय-बॉय कर अचानक फिल्मी जगत में हलचल पैदा कर दी। उनका कहना है कि 5 साल पहले उनके बॉलीवुड में कदम रखने के फैसले ने किस तरह उनकी लाइफ को बदल दिया है। उनको जो भी पहचान मिली है वो उससे बहुत खुश हैं। फिल्म इंडस्ट्री से जुड़ने के बाद उन्हें लोगों का काफी प्यार और सपोर्ट मिला है।लेकिन जायरा का तर्क है कि एक्ट्रेस बनने की वजह से वो अपने इस्लाम धर्म से दूर होती जा रही हैं।

लेकिन इतने कहने भर से सन्यास लेना में कुछ गड़बड़ी है क्योंकि इस बात को हम इस आधार पर कह सकते हैं जनवरी 2017 में कुछ कट्टपंथियों से उनको धमकी मिली थी व उस समय वो जम्मू-कश्मीर की तत्कालीन मुख्यमंत्री मेहबूबा मुफ्ती से भी मिली थी।अलगाववादी लगातार उनके पीछे इसलिए पड़े थे क्योंकि वो कश्मीर की रहने वाली हैं। लेकिन क्या दोबारा ज़ायरा वसीम पर या उनके परिवार को किसी आतंकी संगठन या कट्टर मुस्लिम पंथियों का डर है। शायद उनको फिर से धमकी मिली हो इसलिए उन्होनें यह निर्णय लिया हो क्योंकि बॉलीवुड़ में अपने पैर जमाने के लिए कितना संघर्ष करना पड़ता है यह सब भलि-भांति जानते हैं। बॉलीवुड़ के दिग्गज कलाकार आमिर खान ने उन्हें लोंच किया था । जैसा कि देश में ही नही विदेशों तक में इस दंगल फिल्म ने सुर्खियों बटोरीं थी। इतने कम समय में हर किसी को इतना ज्यादा फेम नही मिलता। 19 वर्ष की उम्र में तीन फिल्म कर ली व एक आने वाली है। जायरा ने साल 2016 में आमिर खान की ‘दंगल’ से बॉलीवुड में कदम रखा था। उनको इस फिल्म के लिए नेशनल अवॉर्ड भी मिला था। जायरा ने फिल्म में पहलवान गीता फोगाट का रोल किया था, जिसके लिए उन्हें बेस्ट सपोर्टिंग एक्ट्रेस का अवॉर्ड मिला था।

2017 में जायरा वसीम ने फिल्म ‘सीक्रेट सुपरस्टार’ में भी आमिर खान के साथ काम किया। इस फिल्म के लिए जायरा को फिल्मफेयर बेस्ट एक्ट्रेस क्रिटिक का अवॉर्ड मिला था। छोटी सी उम्र में ही जायरा को कई अवॉर्ड से नवाजा गया। इतनी कामयाबी के बाद अचनाक धर्म का हवाला देकर क्या साबित करने की कोशिश की जा रही है। जायरा के अनुसार बॉलीवुड़ में जितने भी कलाकार हैं इसका मतलब वो अपने धर्म के विपरित जाकर काम करते हैं। हमारे देश में अधिकतर बड़े फिल्मी कलाकार मुसलमान ही हैं। तर्क कहीं दूर है सच से। साजिश जानबूझ कर की जा रही हैं या डर के मारे यह तो जायरा जानती है या उनका अल्लाह लेकिन यह कहकर इंडस्ट्री छोड़ना कि वो इस वजह से अपने धर्म से दूर होती जा रही हैं,यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण हैं।

चलिये यह उनका निजी फैसला है लेकिन हमे लगता है कि इस मामले की जांच जरुर होनी चाहिए। क्योंकि उनका इस तरह जाना कई सवालिया निशान खड़े कर रहा है साथ ही एक भडकाने वाली स्थिति भी पैदा हो रही है। हमारे देश की जनता बॉलीवुड़ और क्रिकेट को जिंदगी का महत्वपूर्ण हिस्सा मानती है। और जनता ने आज तक कलाकार को अपना आईडियल या हीरो समझने में यह कभी नही सोचा कि उसका कलाकार का धर्म क्या है। देश को नफरत में बांटने वालों को अब और ज्याद हवा मिल जाएगी। इसके अलावा ज़ायरा वसीम को अपना आदर्श मानने वाले लोगों को वो क्या उत्तर देंगी। यदि उनको इस तरह का कोई फैसला लेना था तो वह अपनी निजता का हवाला देकर अलविदा कर देती। इस तरह जाना बहुत बेकार कर गया। अपने साथ इस्लाम धर्म पर भी कई सवाल खड़े कर दिए।बॉलीवुड़ में कैसे गलत है काम करना यह इस्लाम में कहां लिखा है। और यदि कुछ ऐसा भी है उनको क्या करना चाहिए जिससे उनके तकदीर बदली है।अब मालमा चाहे कुछ भी लेकिन धर्म के फर्जी ठेकेदारों की दुकान सजने लगी साथ ही मुसलमानों की आने वाली पीढ़ी का मोरल बेहद कम हो जाएगा।

यदि ज़ायरा वसीम को इस तरह का कुछ फैसला लेना था तो वह पहले भी निर्णय ले सकती थी। जैसा कि उनकी आक्रमक शैली के चलते उनके जीवन व मस्तिष्क अंदाजा लगाया जा सकता है तो वो इतनी तो समझदार पांच साल पहले भी थी। कांटे अब दूसरे के दामन में छोड़कर चले गए क्योंकि फूल तो अपने आंचल के लिए बचा लिए वाली तर्ज पर इस घटना को लेकर चौतरफा निंदा हो रही है। बॉलीवुड़ ने इस मामले को एक भी सितारे ने इसको सपोर्ट नही किया हांलाकि मामला ताजा है तो कुछ लोगों की प्रतिक्रिया नही आई। लेकिन हम सरकार या जांच एजेंसियों से अपील करेगें कि इस मामले की गंभीरता को समझते हुए इसकी जांच की जाए। पुरानी जीवनशैली को देखते हुए शायद कुछ सामने आए क्योंकि ज़ायरा को पांच साल में कई बार धमकियां मिल चुकी थी। हमें हर नजरियें को समझने की जरुरत है। कभी कभी हम सोचते कुछ ओर हैं व सच कुछ अलग ही होता है।

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