आम बजट: राजकोषीय मजबूती पर जोर देने के साथ गांव, गरीब, किसान को साधने की कवायद, मध्यम वर्ग को मायूसी

FM OF INDIA

धीमी पड़ती घरेलू अर्थव्यवस्था को फिर से तेजी की राह पर लाने की चुनौती के बीच पेश मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल के पहले बजट में राजकोषीय अनुशासन को कायम रखते हुये 2022 तक सभी को बिजली, स्वच्छ ऊर्जा और मकान उपलब्ध कराने का वादा कर बजट में गांव, गरीब, किसान को साधने का प्रयास किया गया है। यहीं नहीं 2024 तक नल से हर घर जल पहुंचाने का वादा भी किया गया है।

मोदी सरकार का यह बजट निवेश बढ़ाकर अर्थव्यवस्था को गति देने और आवास सहित सामाजिक क्षेत्र में बड़े पैमाने पर प्रोत्साहन देने के बावजूद आम नौकरी पेशा लोगों और मध्यम वर्ग की उम्मीदों में नये रंग भरने से चूक गया। वेतनभोगी तबके के लिये कर स्लैब और कर दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया लेकिन पांच लाख रुपये तक की करयोग्य आय पर कर छूट को बरकरार रखा गया है। हालांकि, अंतरिम बजट की तरह कर स्लैब में कोई बदलाव नहीं किया गया।

देश की पहली पूर्णकालिक महिला वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में वित्त वर्ष 2019-20 का बजट पेश करते हुए गांव, गरीब और किसान, महिलाओं, छोटे उद्मियों एवं कारोबारियों, निवेशकों के लिए अपने पिटारे से कई घोषणाएं की। इनका सीधा मकसद निवेश को आसान बनाना और आर्थिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करना है।

सीतारमण ने दो घंटे से अधिक लंबे चले बजट भाषण में दो करोड़ रुपये और इससे अधिक की वार्षिक आय वालों पर अधिभार की दर बढ़ा दी है। दो से पांच करोड़ रुपये की वार्षिक आय पर अब 25 प्रतिशत अधिभार देना होगा जबकि पांच करोड़ रुपये से अधिक कमाने वालों पर 37 प्रतिशत की दर से अधिभार का प्रस्ताव किया गया है। इससे पहले 50 लाख से अधिक लेकिन एक करोड़ से कम आय वाले व्यक्तिगत कर दाताओं पर 10 प्रतिशत और एक करोड़ से अधिक लेकिन दो करोड़ से कम आय वालों पर 15 प्रतिशत की दर से अधिभार लागू है।

गैस, जल, सूचना, हवाईअड्डों और राष्ट्रीय राजमार्गो जैसे बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को आगे बढ़ाते हुये ‘‘न्यू इंडिया’’ के सपने को साकार करने की दिशा में अगले पांच साल के दौरान दस लाख करोड़ रुपये का निवेश करने की घोषणा की गई है।

सस्ते मकानों के कर्ज पर अतिरिक्त डेढ लाख रुपये ब्याज के लिए कर कटौती देने का प्रस्ताव है। इससे आवास रिण पर कुल मिलाकर 3.5 लाख रुपये के ब्याज पर कर छूट का लाभ मिलेगा।

कर संसाधन जुटाने के लिये पेट्रोल एवं डीजल पर लगने वाले सड़क एवं अवसंरचना उपकर और विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क में एक-एक रूपये प्रति लीटर की वृद्धि की गयी है जिसका प्रभाव पूरी अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। इससे सरकार को 28,000 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त होगा।

सीतारमण ने 27 लाख 86 हजार 349 करोड़ रुपये के कुल व्यय का बजट पेश किया है जिसमें राजकोषीय घाटा सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 3.3 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया है। पिछले वित्त वर्ष के संशोधित अनुमान में राजकोषीय घाटा छह लाख 34 हजार 398 करोड़ रुपये पर जीडीपी का 3.4 प्रतिशत रहा।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बजट पर अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि इस बजट में आर्थिक सुधार, नागरिकों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने के साथ गांव एवं गरीब का कल्याण भी है। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने जहां इसे नये भारत को साकार करने वाला बजट बताया, वहीं मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस को सरकार का यह सबसे महत्वपूर्ण आर्थिक दस्तावेज महज ‘‘नयी बोतल में पुरानी शराब’’ नजर आया।

 

TEXT-PTI

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